यह वैबसाइट क्यों ?

कई सनाढ्य   संगठन / मंच भारत के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और पत्रिकाएं भी प्रकाशित करते  हैं. इनमें  विभिन्न गतिविधियों को शामिल किया जाता  है.  लेकिन इन पत्रिकाओं का मुख्य उद्देश्य विवाह योग्य बच्चे / बच्चियों के विवरण प्रकाशित करना होता है। जबलपुर से "सनाढ्य  संगम" और "सनाढ्य संवाद", इंदौर से "सनाढ्य  संसार", खंडवा से सनाढ्य ज्योति, मुंबई से सनाढ्य गौड़  महासभा द्वारा प्रकाशित पत्रिका के अलावा, अन्य जगहों से भी  लोग समाज की सेवा कर रहे  हैं।

इस युग में, एक डिजीटल प्लेटफॉर्म की आवश्यकता महसूस की गयी  है जहां ऐसे संगठन/ मंच  एक साथ आ सकते हैं। पत्रिका प्रकाशित करना बहुत ही मेहनत  का काम है; टाइपिंग, प्रिंटिंग, प्रूफ रीडिंग, प्रकाशन, बाइंडिंग और अंत में  वितरण / प्रेषण हेतु एक बड़े लॉजिस्टिक सपोर्ट  की आवश्यकता पड़ती है। यह सब कुछ डिजीटल प्लेटफ़ॉर्म में बहुत अच्छी तरह से विलय किया जा सकता है. यह किसी भी स्थान पर 24x7 आसानी से उपलब्ध हो सकता है. भारत में या विदेश में रह रहे समाज के सदस्यों को, जहां मुद्रित संस्करण की उपलब्धता मुश्किल होती है, यह एक आसान जरिया बन सकता है.

उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए, प्रमोटर्स (जो मध्यप्रदेश के एक सनाढ्य  परिवार से ही  हैं) ने, इस वैबसाइट को  विभिन्न क्षेत्रों / राज्यों के सभी  सनाढ्यों  को एक मंच पर लाने की  दृष्टि से लॉन्च किया है, जहां हर कोई अपना अस्तित्व, वंश-वृक्ष, वैवाहिक  प्रस्ताव, उपलब्धियां और ऐसे कई अन्य गतिविधियों  को साझा कर सकता है।

सदस्यता के लिए पंजीकरण नि: शुल्क रखा गया  है। सदस्यों से अनुकूल प्रतिक्रिया आने  पर शुल्क सहित  सेवाओं को भी जोड़ा जा सकेगा।

हमारी अब तक की यात्रा

इस पोर्टल की  अवधारणा वर्ष 2012 के अंतिम दिन की गयी थी।  बीच के इन

5 वर्षों से ज्यादा की अवधि में  समाज  के बुजुर्गों एवं  सक्रिय सदस्यों के साथ

विभिन्न स्थानों/ फोरमों में इस अवधारणा  पर विचार विमर्श किया गया परन्तु

अंतिम परिणाम कहीं भी निकलता दिख नहीं  रहा था. अंत में उपरोक्त विचार विमर्श

को ध्यान में रखते हुए 2017 की चैत्र नवरात्रि  को वेबसाइट के लॉन्च के लिए

तय किया गया . लेकिन, सर्वशक्तिमान ने पहले ही प्रमोटरों के लिए कुछ और तय

करके रखा  था.   "TRIPOD" के  एक जनक एवं फाउंडर तकनीकी-प्रमुख  विशाल शर्मा ,

जिन्होंने इस पोर्टल  की संकल्पना की थी,  एक असाध्य कैंसर की गिरफ्त में आ गए,

जिसका उपचार विश्व में अभी तक  खोजा नहीं  जा सका है। तीन माह की अल्प अवधि

की लड़ाई के बाद ही  ईश्वर की इच्छा के सामने उन्हें हार माननी पड़ी और 20 अगस्त 2017

को "विशाल" उस परमपिता परमेश्वर में विलीन हो गए.

"शो मस्ट  गो ऑन " के सिद्धांत पर चलते हुए  वर्तमान तकनीकी प्रमुख एवं विशाल के

अनन्य सहयोगी "श्री महेश" ने बिखरी कड़ियों को फिर से जोड़ा तथा परियोजना का पुनरीक्षण

 कर इस पोर्टल पर बचा हुआ  काम पूरा किया।

यह  वेबसाइट "sanadhyapatrika.in" आज  2018 की चैत्रप्रतिप्रदा को सनाढ्य समाज के लिए 

लॉन्च के लिए तैयार है।

यह वेबसाइट  "TRIPOD" की ओर से स्वर्गीय  विशाल को  समर्पित है |