समाज के गौरव : डॉ उदैनिया

 

सनाढयों में ऐसे कई गौरव हैं जो समाज के साथ साथ ही मानवता की भी अनवरत सेवा कर रहे हैं। इनमें से एक डॉक्टर एस पी उदेनिया  हैं।  आप जबलपुर के गोकुलपुर में पिछले ४७ वर्षों से लगातार डॉक्टर के रूप में गोकुलपुर एवं आसपास के निवासियों की बहुत ही कम  फीस लेकर  उचित  चिकित्सा कर रहे हैं. आपके बड़े भाई स्वर्गीय डॉक्टर ओ पी उदैनिया , ने भी जी सी एफ एस्टेट के पास चुंगी चौकी , कांचघर और शोभापुर के निवासियों  की  सेवा इसी तरह की थी.

१२ अप्रैल १९४२ को  जन्मे डॉ. उदैनिया   की पढ़ाई जबलपुर के संत थॉमस स्कूल एवं जी सी एफ हाई स्कूल में हुई. रजिस्टर्ड  मेडिकल प्रैक्टिशनर  का सर्टिफिकेट लेकर अक्टूबर १९६६ ( शारदेय नवरात्र की अष्टमी ) से चिकित्सा शुरू करने के बाद उन्होंने पीछे मुड़  कर नहीं देखा। गोकुलपुर एवं आसपास रहने वाले ज्यादातर लोग गन कैरिज फैक्ट्री , सेंट्रल ऑर्डनेन्स डिपो , खमरिया  फैक्ट्री आदि के सामान्य कर्मचारी एवं उनके परिवार जनों को बहुत ही कम फीस में  दवाई देकर वे सभी के लिए ईश्वर के रूप में सहायता करने लगे. पास के ही  इंजीनियरिंग कॉलेज कॉलोनी के लेक्चरर्स  एवं कर्मचारी भी उनके ईलाज को पसन्द  करते हैं .

इस बीच उन्होंने जबलपुर विश्वविद्यालय का BAMS का  Integrated Course भी ज्वाइन किया और एलोपैथी  तथा आयुर्वेद  दोनों विधा की चिकित्सा हेतु पारंगत एवं अधिकारी हो गए. उन्होंने होमियोपैथी का BHMS कोर्स भी किया।  इस तरह तीन तरह की चिकित्सा करने के अधिकारी होने के बाद भी उन्हें होमियोपैथी की चिकित्सा में ज्यादा रूचि है.  नजदीकी मरीजों को वे होम्योपैथिक दवाई देना ही पसंद करते हैं.

सत्तर के दशक में हमने देखा है कि  मरीज दवाई लेने के बाद जब पैसे पूछता था , तब वे  हंस कर कहते  थे कि  कितने हैं तुम्हारे पास? आठ आना या एक रुपया कुछ भी देकर कहता था की बाद में दे देंगे। लिख लीजिये।उसकी पर्ची  डॉक्टर साब अपने पास ही  रखते थे, पेमेंट मिलने के बाद , मरीज आकर जब पूछता  था कि कुल कितने हो गए. तब भी उनका वही जवाब होता था कि,  कितने हैं तुम्हारे पास? इलाज बढिया  और कम फीस होने के कारण मरीजों की भीड़  लगी रहती थी , सो कौन जोड़ेगा पूरे महीने का हिसाब।इसी तरह सालों हो गए।  पर्चियां पुरानी  होकर  ख़राब हो जाती थीं  और हिसाब भी डूब जाता था. मरीज आधी अधूरी पेमेन्ट देकर  दवाई लेता रहता था, परन्तु डॉक्टर साब ने कभी किसी को इलाज करने से मना  नहीं किया। आज भी जब जनरल डॉक्टर्स   की फीस १५० से २००   रुपये है, इनकी फीस ५० रुपये ही है  जो उन्होंने १ जनवरी २०१३ से अभी तक बढ़ाई  नहीं है.

sanadhyapatrika.in  ,  समाज गौरव : ७६ वर्षीय डॉक्टर शिव प्रकाश उदैनिया जी को   उनके द्वारा ५१  वर्षो से की जा रही अनवरत  मानव सेवा की सराहना  करता है एवं उनके शतायु होने की शुभकामना  देता है.

रमेश बालोठिया , अंबरनाथ, मुंबई